सी. पी. राधाकृष्णन बने भारत के 15वें उपराष्ट्रपति एनडीए उम्मीदवार की 152 वोटों से जीत, विपक्ष की एकता पर उठे सवाल नई दिल्ली। मंगलवार को सम्पन्न हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए प्रत्याशी और महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन ने शानदार जीत दर्ज की। उन्होंने विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के उम्मीदवार पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश बी. सुधर्शन रेड्डी को 152 मतों के अंतर से पराजित कर दिया। चुनाव परिणाम कुल मतदाता: 781 सांसद मतदान में भाग: 767 (98.2%) वैध मत: 752 राधाकृष्णन को मिले: 452 वोट (60.10%) सुधर्शन रेड्डी को मिले: 300 वोट (39.90%) जीत का अंतर: 152 वोट पृष्ठभूमि यह चुनाव पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों से दिए गए इस्तीफे के बाद कराया गया। इस चुनाव को लेकर सियासी हलकों में काफी उत्सुकता थी क्योंकि विपक्ष ने पहली बार किसी पूर्व न्यायाधीश को मैदान में उतारा था। क्रॉस वोटिंग के संकेत परिणाम आने के बाद साफ हुआ कि विपक्षी एकता में दरार पड़ी है। सूत्रों के अनुसार कई सांसदों ने दलगत सीमा लांघकर राधाकृष्णन को समर्थन दिया। इसी वजह से विपक्षी उम्मीदवार को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया। कौन हैं सी. पी. राधाकृष्णन? जन्म: 20 अक्टूबर 1957, तिरुप्पुर (तमिलनाडु) राजनीतिक पृष्ठभूमि: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ाव और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता। सांसद: कोयम्बटूर से दो बार सांसद रह चुके। राज्यपाल: महाराष्ट्र, झारखंड और तेलंगाना के राज्यपाल; पुदुच्चेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाला। सामाजिक कार्य: दक्षिण भारत में शिक्षा और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई अभियानों में सक्रिय भूमिका। महत्व और राजनीतिक संदेश विशेषज्ञों का मानना है कि एनडीए ने राधाकृष्णन को मैदान में उतारकर दक्षिण भारत और ओबीसी (गौंडर समुदाय) को साधने की कोशिश की है। उनकी छवि गैर-विवादित और मिलनसार मानी जाती है। यह जीत विपक्षी INDIA ब्लॉक की एकजुटता पर भी सवाल खड़े करती है। बधाइयों की झड़ी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने सी. पी. राधाकृष्णन को शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा – “राधाकृष्णन जी का अनुभव और शांत स्वभाव संसद को और मजबूत बनाएगा।”
कैप्सूल कैमरा और गामा-रे डिटेक्टर से अब आंतरिक अंगों की जांच होगी और भी आसान
📌 परिचय चीन के वैज्ञानिकों ने चिकित्सा जगत के लिए एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए ऐसा विशेष कैमरा विकसित किया है, जिससे शरीर के आंतरिक अंगों को बिना बड़ी सर्जरी और जटिल प्रक्रियाओं के देखा जा सकता है। यह तकनीक न केवल मरीजों के लिए सुविधाजनक है, बल्कि डॉक्टरों को भी बीमारियों की पहचान पहले से कहीं अधिक स्पष्ट रूप में करने का अवसर प्रदान करती है। 🧪 तकनीक का आधार यह आविष्कार दो मुख्य तकनीकों पर आधारित है: कैप्सूल कैमरा (Capsule Endoscopy): मरीज केवल एक छोटी कैप्सूल निगलता है, जिसमें हाई-डेफिनिशन कैमरा और सेंसर लगे होते हैं। यह कैप्सूल पाचन तंत्र से गुजरते हुए लगातार तस्वीरें खींचती है और वायरलेस तकनीक से बाहर भेजती है। इससे पेट, आंतों और पाचन तंत्र की बारीक जांच संभव हो जाती है। गामा-रे डिटेक्टर (Gamma-Ray Imaging): चीन और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक नया गामा-रे डिटेक्टर विकसित किया है। यह बहुत कम रेडिएशन खुराक में भी आंतरिक अंगों की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें ले सकता है। इससे कैंसर जैसी बीमारियों का निदान तेज़ और सुरक्षित तरीके से हो सकता है। ✅ संभावित लाभ मरीजों की सुविधा: बिना दर्द और बिना जटिल प्रक्रियाओं के जांच संभव। कम रेडिएशन: परंपरागत एक्स-रे और सीटी स्कैन की तुलना में कहीं कम जोखिम। तेज़ निदान: डॉक्टर बीमारियों को शुरुआती अवस्था में ही पहचान सकेंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोग: भविष्य में इसे सामान्य अस्पतालों और छोटे क्लीनिकों में भी आसानी से उपयोग किया जा सकेगा। ⚠️ चुनौतियाँ लागत (Cost): शुरुआती दौर में इसकी कीमत अधिक होगी, जिससे आम मरीजों तक पहुंचना कठिन हो सकता है। तकनीकी प्रशिक्षण: डॉक्टरों और स्टाफ को इस नई तकनीक को उपयोग करने के लिए विशेष प्रशिक्षण लेना होगा। नैतिक और सुरक्षा मुद्दे: मरीजों की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी चुनौती होगा। 🌍 भविष्य की संभावनाएँ विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक आने वाले समय में स्वास्थ्य जगत में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। कैंसर, हृदय रोग और पाचन तंत्र संबंधी बीमारियों की पहचान पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगी। अगले दो वर्षों में इसे चीन के प्रमुख अस्पतालों में लागू करने की योजना है और भविष्य में इसे विश्वभर में निर्यात किया जा सकता है। समापन (Conclusion): चीन का यह आविष्कार चिकित्सा विज्ञान में एक नई दिशा की शुरुआत है। यदि यह तकनीक सफलतापूर्वक आम लोगों तक पहुंचाई जाती है, तो यह स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ, सुरक्षित और आधुनिक बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।