
शिक्षा का महत्व
शिक्षा केवल किताबों के पन्नों तक सीमित नहीं होती, यह इंसान के जीवन का सबसे उज्ज्वल दीपक है।यह वह चाबी है, जो अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का उजाला फैलाती है।शिक्षा हमें सिर्फ पढ़ना-लिखना नहीं सिखाती, बल्कि सोचने, समझने और सही रास्ता चुनने की ताकत देती है।
यह हमारे सपनों को पंख देती है और हमें इस काबिल बनाती है कि हम अपनी पहचान खुद बना सकें।
लेकिन शिक्षा में तभी असली चमक आती है जब उसमें जुनून हो।
जुनून वह आग है जो साधारण को असाधारण बनाती है।
जो व्यक्ति शिक्षा के साथ जुनून को जोड़ लेता है, उसके लिए कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता।
शिक्षा हमें संस्कार देती है।
शिक्षा हमें संघर्ष से लड़ने की शक्ति देती है।
शिक्षा हमें समाज की भलाई के लिए जागरूक बनाती है और शिक्षा हमें सपनों को हकीकत में बदलने का साहस देती है।
याद रखिए –
बिना शिक्षा का जीवन अंधेरे कमरे जैसा है।
और बिना जुनून की शिक्षा, दीपक बिना लौ के समान है।
इसलिए, शिक्षा को सिर्फ जिम्मेदारी न समझें,
बल्कि इसे जीवन का सबसे बड़ा अवसर मानकर अपनाएँ।
और इसमें ऐसा जुनून जगाएँ कि आपकी मेहनत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन जाए।
Dr A.P.J ABDUL KALAM

- APJ ABDUL KALAM
- “मिसाइल मैन ऑफ इंडिया” और भारत के 11वें राष्ट्रपति।
- साधारण परिवार से आने के बावजूद कठिन परिश्रम और शिक्षा के बल पर महान वैज्ञानिक बने
- छात्रों के बीच लोकप्रिय, हमेशा कहा – “सपना वो नहीं जो सोते समय आता है, सपना वो है जो आपको सोने न दे।”
- शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा हथियार मानते थे।
Baba Saheb Dr B.R Ambedkar

भारत के संविधान निर्माता।
समाज में कठिन परिस्थितियों में जन्म लेने के बावजूद शिक्षा से अपनी राह बनाई।
उन्होंने कहा – “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।”
शिक्षा को समानता और स्वतंत्रता पाने का सबसे मजबूत साधन बताया।
बिलकुल
मैं आपको डॉ. भीमराव अंबेडकर (बाबा साहेब) की जीवनी शिक्षा और समाज सुधार की दृष्टि से विस्तार में लिखकर दे रहा हूँ। यह ऐसे लिखा है जैसे आप कहानी / निबंध के रूप में पढ़ें और याद कर सकें।
डॉ भीमराव अंबेडकर की जीवनी
(शिक्षा की कठिनाइयों से सामाजिक बदलाव तक)
1. प्रारंभिक जीवन और जन्म
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू नामक स्थान पर हुआ।
वे महार जाति से थे, जिसे समाज में अछूत माना जाता था।
बचपन से ही उन्हें भेदभाव सहना पड़ा। स्कूल में उन्हें अलग बैठाया जाता था और पानी तक छूने की अनुमति नहीं थी
2. शिक्षा पाने की कठिनाइयाँ
समाज का माहौल उनके लिए पढ़ाई करना लगभग असंभव बना देता था।
कई बार शिक्षक उन्हें पढ़ाने से कतराते थे।
किताबें, बैठने की जगह और अवसर सब सीमित थे।
लेकिन भीमराव ने निश्चय किया कि वे शिक्षा के बल पर अपना और समाज का भाग्य बदलेंगे।
3. उच्च शिक्षा की यात्रा
उन्होंने पहले एलफिन्स्टन कॉलेज, मुंबई से पढ़ाई की।
फिर छात्रवृत्ति के सहारे वे अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय गए और वहाँ से M.A. और Ph.D. की डिग्री हासिल की।
बाद में लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से D.Sc. की उपाधि पाई और बार-एट-लॉ की डिग्री भी ली।
यह सब उस समय एक दलित व्यक्ति के लिए असंभव सा था, लेकिन उन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया।
4. समाज सुधार की शुरुआत
शिक्षा प्राप्त करने के बाद बाबा साहेब ने महसूस किया कि केवल शिक्षा ही दलितों और वंचितों को सशक्त बना सकती है।
उन्होंने बहिष्कृत हितकारिणी सभा की स्थापना की।
दलितों को मंदिरों और पानी के स्रोतों में प्रवेश दिलाने के लिए आंदोलन चलाए (जैसे महाड़ सत्याग्रह, नासिक मंदिर प्रवेश आंदोलन)।
उनका नारा था – “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।”
5. राजनीतिक और सामाजिक योगदान
वे भारत के संविधान सभा के प्रमुख निर्माता बने और संविधान में समानता, स्वतंत्रता और न्याय की गारंटी दिलाई।
उन्होंने जाति प्रथा, अछूत प्रथा और सामाजिक अन्याय के खिलाफ जीवनभर संघर्ष किया।
14 अक्टूबर 1956 को उन्होंने लाखों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपना लिया।
6. निष्कर्ष
बाबा साहेब की कहानी हमें यह सिखाती है कि –
गरीबी और जातिगत भेदभाव कितने भी बड़े हों, शिक्षा के बल पर उन्हें हराया जा सकता है।
एक व्यक्ति यदि संकल्प कर ले तो पूरे समाज को बदल सकता है।
वे केवल संविधान निर्माता ही नहीं, बल्कि शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के प्रतीक बन गए।
इसलिए डॉ. भीमराव अंबेडकर की जीवनी शिक्षा से सामाजिक बदलाव की सबसे बड़ी प्रेरणा है।
क्या चाहेंगे कि मैं इसे स्कूल निबंध / परीक्षा लिखने लायक छोटे-छोटे बिंदुओं में भी बना दूँ ताकि आप सीधे लिख सकें?
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
भारत के द्वितीय राष्ट्रपति और महान शिक्षक।
जीवनभर शिक्षा और अध्यापन को सर्वोच्च स्थान दिया।
उनके सम्मान में ही भारत में 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है।
उनका मानना था – “शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाना है।”
जीवन को बदलना है तो बेहतर शिक्षा केन्द्र बनाए।
वह आपका घर हो सकता है, विद्यालय, पुस्तकालय या विश्वशनीय शिक्षा संस्थान
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